28 जनवरी 2013 - 20:30

आज इस्लामी जगत और मुसलमान बहुत बड़ी बड़ी कठिनाईयों में फँसे हुए हैं जिनमें बहुत सी कठिनाईयों का कारण स्वंय मुसलमान हैं क्योंकि मुसलमानों नें दुनिया की लालच में इस्लाम को छोड़ दिया और इस्लाम जहाँ उन्हें ले जाना चाहता था............

आज इस्लामी जगत और मुसलमान बहुत बड़ी बड़ी कठिनाईयों में फँसे हुए हैं जिनमें बहुत सी कठिनाईयों का कारण स्वंय मुसलमान हैं क्योंकि मुसलमानों नें दुनिया की लालच में इस्लाम को छोड़ दिया और इस्लाम जहाँ उन्हें ले जाना चाहता था और जिस चोटी पर उसे खड़ा करना चाहता था वहाँ तक नहीं पहुँच सके, अब एक ही रास्ता है कि हम अपने गरेबान में झांके, यह जानने का प्रयास करें कि हमारे पीछे रह जाने के क्या कारण है, अपनी ग़ल्तियों को जानने और समझने के बाद उनसे तौबा करें क्षमा याचना करें और नए सिरे से उस रास्ते पर चलें जो इस्लाम नें हमें बताया है और उसी तरह से चलें जिस तरह इस्लाम नें कहा है। मुसलमानों के हर विभाग में पीछे रह जाने और दुश्मन के सामने घुटने टेक देने की बहुत से कारण हैं जिनमें एक कारण यह है कि हमारे अन्दर एकता नहीं है, दुश्मन नें बड़ी होशियारी और चतुरता से हमें एक दूसरे से अलग कर दिया है, मुसलमानों की यह हालत हो गई है कि वह एक दूसरे को मारने, एक दूसरे को खा जाने और एक दूसरे को नीचा दिखाने के प्रयास में लगे हुए हैं और हम सब का दुश्मन हमारी इस कमज़ोरी से लाभ उठा कर हम पर हुकूमत भी करता है और हमारे ख़ज़ानों को लूट भी रहा है। हम सबको सावधान होना होगा और दुश्मन की इस योजना को समझना होगा यानी हमें एक तस्बीह के दानों के समान आपस में मिलना होगा और एक प्लेट फ़ार्म पर एकत्रित होना होगा। आज अमेरिका की धमकियां किसी एक देश या दो देशों के लिये नहीं बल्कि सबके लिये हैं, आज जायोनी लॉबी का ख़तरा किसा एक देश के लिये नहीं बल्कि वह इस इलाक़े व क्षेत्र के सभी देशों के लिये ख़तरा है क्योंकि वह किसी एक देश पर क़ब्ज़ा नहीं करना चाहते बल्कि इस क्षेत्र के सभी देशों पर अपना झंडा गाड़ना चाहते हैं। वह सौ साल से इस पर काम कर रहे हैं और बड़े मध्यपूर्व का सपना देख रहे हैं इसलिये बुद्धिमानी इसी में है कि हम इस बात को समझें और एक दूसरे के साथ लड़ने और एक दूसरे के गले काटने के बजाए अपने एक दुश्मन के विरोध में इकट्ठा हों। हमारा दुश्मन आज भी हमारे बीच उसी पुरानी योजना को इस्तेमाल कर रहा है यानी फूट डालो हुकूमत करो। अगर हम इकट्ठा भी होना चाहेंगे तो दुश्मन उन्ही चीज़ों को उछालेगा जिन्हें इस्लाम नें कोई महत्व नहीं दिया है और उन्ही चीज़ों को बड़ा बनाकर पेश करेगा जिनको इस्लाम की नज़र में कोई हैसियत नहीं है। इस्लाम नें किसी क़ौम, क़बीले, जाति, ज़बान और क्षेत्र को अहमियत नहीं दी है। इस्लाम का बस एक सिद्धांत है: ’’اِنَّ اَکرَمَکُم عِندَ اللہَ اَتقَاکُم‘‘ अल्लाह के यहाँ बस एक चीज़ को महत्व है और वह है ईमान और तक़वा (सदाचार)। इस्लाम ने सबको मुसलमान बनाया है और सबको मुसलमान देखना चाहता है। क़ुरआने मजीद नें ’’اِنّما المُومِنُونَ اِخوَۃ‘‘ कह कर सभी मुसलमानों को एक दूसरे का भाई बनाया है। अब जो भी ख़ुदा पर ईमान रखता है, क़ुरआन को ख़ुदा की किताब मानता है. काबे की तरफ़ खड़ा हो कर के नमाज़ पढ़ता है वह मोमिन है और दूसरे मोमिनों का भाई है। इस्लाम हमसे यह कहता है लेकिन हम एक दूसरे पर कीचड़ उछालते हैं, यद्धपि सब मुसलमान ऐसा नहीं करते, कुछ ही लोग हैं जो ऐसा करके दुश्मन की सहायता करते हैं ऐसे लोगों को रोकने की ज़रूरत है। आज मुसलमानों को अपनी सफलता, तरक़्क़ी और कठिनाईयों से बाहर निकलने के लिये सबसे ज़्यादा इसी एकता की आवश्यकता है। आज सबसे ज़्यादा इसी चीज़ की ज़रूरत है। नहीं मालूम हम इस बारे में सोचते क्यों नहीं हैं? अगर हमारा दुश्मन कामयाब हो गया और उसनें इस पूरे क्षेत्र पर अपना क़ब्ज़ा जमा लिया तो हम फिर से सौ साल पीछे हो जाएंगे। इसका जवाब हमें देना होगा। आज सारे मुसलमान देश, सारे मुसलमान राज्य, विद्धवान व बुद्धीजीवी, पढ़े लिखे और बुद्धिमान लोग इसके ज़िम्मेदार हैं। इमाम ख़ुमैनी र.ह नें इस्लामी इन्क़ेलाब की सफलता के बाद जिस चीज़ पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया और अपनी ज़िन्दगी के आख़िर तक जो बात कहते रहे वह यही मुसलमानों की एकता है। आज हम देख रहे हैं कि उन्होंनें जिस तरह हमें दुश्मन के षड़यंत्रों से सावधान किया था वह बिल्कुल सही था। अगर हम उनके बताए हुए रास्त पर चलते रहें जो कि इस्लाम का और क़ुरआन का रास्ता है और छोटी छोटी चीज़ों में उलझने और लड़ाईयां लड़ने के बजाए एक प्लेट फ़ार्म पर इकट्ठा होकर अपने दुश्मन का विरोध करें तो हम फिर वही मान सम्मान प्राप्त कर सकते हैं जो पहले हुआ करता था। ............. 166